आरती श्री नन्दीश्वर द्विप
जय नन्दीश्वर दीप, शाश्वत जिन-आवास |
अठ्ठाई कोड़ि मूरत, अमर तीर्थ वास |
ॐ जय नन्दीश्वर प्रभो ||
आठवें द्वीप पर शाश्वत, जिन-प्रतिमाएँ राजें-2 |
अष्टाह्निका पर्व पर, देव-गण पूजें |
ॐ जय नन्दीश्वर प्रभो ||
चार दिशाओं में चार, अंजन-गिरि सोहें-2 |
बावन जिन-चैत्यालय, भक्तों के मन मोहें |
ॐ जय नन्दीश्वर प्रभो ||
मनुष्य-गति से परे, यह तीर्थ अनूपम-2 |
भावना से आराधना, करें हम प्रतिपल |
ॐ जय नन्दीश्वर प्रभो ||
नन्दीश्वर की आरती, जो नित्य उतारें-2 |
तीनों लोक-तीनों काल, के जिन को ध्यारें |
ॐ जय नन्दीश्वर प्रभो ||