आरती श्री चौबीस तीर्थंकर
ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म सुपार्श्व की जय |
Rishabh Ajit Sanbhav Abhinandan, Sumati Padma Suparshv Ki Jai |
महाराज की श्रीजिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय ||
Maharaj Ki Shri Jinraj Ki, Deendayal Ki Aarti Ki Jai ||
चंद्र पुष्प शीतल श्रेयांस, वासुपूज्य महाराज की जय |
Chandra Pushp Sheetal Shreyans, Vasupujya Maharaj Ki Jai |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय ||
Maharaj Ki Shri Jinraj Ki, Deendayal Ki Aarti Ki Jai ||
विमल अनंत धर्म जस उज्ज्वल, शांतिनाथ महाराज की जय |
Vimla Anant Dharm Jas Ujjwal, Shantinath Maharaj Ki Jai |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय ||
Maharaj Ki Shri Jinraj Ki, Deendayal Ki Aarti Ki Jai ||
कुंथ अरह और मल्लि मुनिसुव्रत, नमिनाथ महाराज की जय |
Kunth Arah Aur Malli Munisubrat, Naminath Maharaj Ki Jai |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय ||
Maharaj Ki Shri Jinraj Ki, Deendayal Ki Aarti Ki Jai ||
नेमिनाथ प्रभु पार्श्व जिनेश्वर, वर्द्धमान महाराज की जय |
Neminath Prabhu Parshva Jineshwar, Vardhman Maharaj Ki Jai |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय ||
Maharaj Ki Shri Jinraj Ki, Deendayal Ki Aarti Ki Jai ||
इन चौबीसों की आरती करके, आवागमन-निवार करने का शुभ अवसर है। इस अवसरे पर हम सब मिलकर इनकी आरती का पाठ करते हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि यह यूं ही जारी रहे। यह आरती सभी के दिलों में सुख और समृद्धि लाए। गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। क्या कहा गया है इस आरती में! ये हमारे जीवन को दिशा देने वाली बातें हैं। जो हम सबके लिए बहुत महत्त्व रखती हैं। जब हम इन चौबीस तीर्थंकरों का स्मरण करते हैं और उनकी आरती करते हैं तब वो क्षण हमें जोड़ता है। ऐसा लगता है जैसे कुछ खास हो रहा हो। जरूर होना चााहीए। अवश्य होना चाहिए। हां! ऐसे अवसर हर पल होते रहने चाहिए। हमें ऐसी संतुष्टि होती है कि या तो उनके आदर्शों का पालन करना हमारी पहली प्राथमिकता रहेगी। ऐसा करना होगा ताकि श्रेयांव प्राप्त कर सकें। यह सही कारण है कि साथ मिला रहता है और यह एक दूसरे का मार्ग प्रशस्त करता है ताकि सबका कल्याण हो सके। इसलिए इस आरती से जो शक्ति हमें मिलती है वो अनमोल होती है और हमेशा रहेगी। हमारा यह अस्तित्व प्रगति के स्थिर कुल में होने वाला है। समाज के उपकार में अनगिनत लाभकारी संविधाएँ होंनी चाहिए जिन्हें ऊर्जा के रूप में कार्यान्वयित किया जाएं ताकि लोगों को लाभ मिल सके तथा स्वисидики आस्तित्व भी हो सके—क्या बात कह उठी! इस विचार को हरे देव से जोड़कर रखा जा सकता है जिससे जीवन सही दिशा पकड़ सके ||
Maharaj Ki Shri Jinraj Ki, Deendayal Ki Aarti Ke Sath Hi Kalyan Ka Marg Prashast Ho ||