आरती श्री विमलनाथ जी
जय विमलनाथ प्रभो, स्वामी जय विमलनाथ |
कांपिल्य में अवतरे, निर्मल ज्ञान-साथ |
ॐ जय विमलनाथ प्रभो ||
कृतवर्मा राजा पिता, श्यामादेवी माता-2 |
माघ शुक्ल तृतीया को, जन्म शुभ आता |
ॐ जय विमलनाथ प्रभो ||
साठ धनुष की काया, सुवर्ण वर्ण राजे-2 |
शूकर-लांछन धारण किए, जग में खूब छाजे |
ॐ जय विमलनाथ प्रभो ||
तीस लाख पूर्व आयु, धर्म-शासन फैलाया-2 |
सम्मेद शिखर जाकर, मोक्ष-पद पाया |
ॐ जय विमलनाथ प्रभो ||
भक्त-जन निर्मल मन से, आरती उतारें-2 |
विमलनाथ की शरण से, जीवन को सँवारें |
ॐ जय विमलनाथ प्रभो ||