आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले, कपट की राह में चले |
आर्जव धर्म अपनाओ भाई, मन से माया को टाले ||
Arjav-kapti nar koi saanch na bole, kapat ki raah mein chale |
Arjav dharm apnao bhai, man se maya ko tale ||
कुटिलता-वक्रता को छोड़ो, सरलता से जीवन चलाओ | इसको सचमुच में अमल करना जरूरी है। बिना झूठ और ढोंग के, बस सीधे-साधे बने रहो। जब आप ऐसा करते हैं, तो कम से कम कुछ चीजें तो सीधी दिखती हैं।
मन-वचन-काय से एक हो कर, आर्जव धर्म अपनाओ || जो भी करें, सभी का भाव एक होना चाहिए। यह मदद करता है सही रास्ता देखने में।
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले ||
Kutilta-vakrta ko chhodo, saralta se jeevan chalao | Be honest and live openly. Never fake it. ये ज़रूरी है कि हम अपनी पहचान जानते रहें।
Man-vachan-kay se ek ho kar, arjav dharm apnao || अब वक्त आ गया है कि सात्विकता को समझें और अपनाएं। आम जीवन में इसे अपनाने से ही सब चलता है।
Arjav-kapti nar koi saanch na bole ||
दशलक्षण पर्व आया है भाई, दस धर्मों को पहचानो | ठीक ढंग से उनका पालन करें और अपने जीवन में साम integrate करें। यह त्यौहार हमें धर्मों के महत्व की याद दिलाता है। हमें बस पहल करनी होती है।
उत्तम क्षमा-मार्दव-आर्जव से, अपने जीवन को सजाओ || रिश्तों में खुशी लाने के लिए ये जरूरी हैं। आख़िरकार जो अपने हैं, उनके साथ अच्छा रहना चाहिए। उक्त बातें हमें यह दिखाती हैं की उन्हें सद्भावना से कैसे जी सकते हैं।
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले ||
Dashlaxan parv aaya hai bhai, das dharmon ko pehchano | Kuch baatein Jaruri hoti hain jiski sabse zyada ahmiyat hoti hai. सबसे सरल बातों में अच्छे विचार छुपे होते हैं,
Uttam kshama-maardav-arjav se, apne jeevan ko sajao || Isse हमारा मन शांत फिर होता है। ये हमारे जीवन को ट्रैक पर लाने का काम करती हैं और इसे बेहतर बनाती हैं।
Arjav-kapti nar koi saanch na bole ||
माया-छल-प्रपंच छोड़ दो, निष्कपट जीवन बिताओ | ईमानदारी से जीने का जीवन ही सबसे अच्चा है। प्रेरणा कभी कमी नहीं होनी चाहिए क्यों कि यही रास्ता है तरक्की का और आने वाली पीढ़ी इसे स्वीकार करेंगी। कोई भी सत्य समाज के लिए बेहतर होता है शांति लाने वाला और विशेष निर्माण करने वाला होते हुए दिखाई देता है ।
आत्मा की शुद्धि के लिए, आर्जव-धर्म को अपनाओ || साफ और स्पष्ट रहें ताकि आत्मा की भी स्पष्टता बिगड़ न जाए। जब हम ईमानदार बनते हैं तभी हम सही मायने में ख़ुश रहते हैं । ये सब बेहतर बनाते हैं और महान विचारों को जन्म देते हैं ।
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले ||
Maya-chal-prapancha chhod do, nishkapat jeevan bitao | Samunder ki leharon ki tarha sacha hona parta hai jisse manzil tak pahunchtne me madad mil sake.
Aatma ki shuddhi ke liye, arjav-dharm ko apnao || Hamesha samanya vichar sabse accha hota hai। हम जब ऐसे रहते हैं तो कभी भी पछताना नहीं पड़ता वरना पेचीदगियों में उलझ जाते हैं जिससे आगे बढ़ना कठिन हो जाता है ।
Arjav-kapti nar koi saanch na bole ||