आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले, कपट की राह में चले |
आर्जव धर्म अपनाओ भाई, मन से माया को टाले ||
कुटिलता-वक्रता को छोड़ो, सरलता से जीवन चलाओ |
मन-वचन-काय से एक हो कर, आर्जव धर्म अपनाओ ||
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले ||
दशलक्षण पर्व आया है भाई, दस धर्मों को पहचानो |
उत्तम क्षमा-मार्दव-आर्जव से, अपने जीवन को सजाओ ||
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले ||
माया-छल-प्रपंच छोड़ दो, निष्कपट जीवन बिताओ |
आत्मा की शुद्धि के लिए, आर्जव-धर्म को अपनाओ ||
आर्जव-कप्ति नर कोई साँच न बोले ||