उड़ जाओ पक्षी
उड़ जाओ पक्षी उड़ जाओ, संसार के बंधन छोड़ जाओ |
माया-मोह के जाल में फँसे हो, मुक्त होकर उड़ जाओ ||
यह देह पिंजरा टूट जाएगा, एक दिन सब छूट जाएगा |
आत्मा अमर है शाश्वत है, ऊँचे गगन में उड़ जाओ ||
गुरु-वचन का रस पी लो, सम्यक् ज्ञान का दीप जलाओ |
पंच परमेष्ठी की शरण में, मोक्ष-मार्ग पर उड़ जाओ ||
अहिंसा-धर्म को अपनाओ, सत्य-मार्ग पर चलते जाओ |
कषाय-राग-द्वेष छोड़ कर, शिव-नगरी में उड़ जाओ ||
उड़ जाओ पक्षी उड़ जाओ, संसार के बंधन छोड़ जाओ |
माया-मोह के जाल में फँसे हो, मुक्त होकर उड़ जाओ ||