श्री शनि चालीसा
शनि चालीसा, ये एक खास और अद्भुत तरीका है शनि देव की भक्ति और उनकी सराहना करने का। इसे हम न्याय के देवता मानते हैं। बहुत से लोग इस विश्वास में हैं कि विशेष रूप से शनिवार के दिन इसका पाठ करने से हमारी साढ़ेसाती और ढैय्या जैसी परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है। इसलिए इनमें से कई लोग इस पाठ को अपने कठिन समय और मुसीबतों के समय पढ़ना पसंद करते हैं, जब चाहे जैसी परिस्थिति हो। इससे मनोबल बढ़ाना आसान होता है, जो जीवन के उतार-चढ़ाव को सहन करने की ताकत देता है।
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Karan Kripal.
Deenan ke dukh door kari, Keejai Nath Nihal.
चौपाई (मुख्य अंश)
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चार भुजा तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेड़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमकैं। हिय माल मुक्तन मणि दमकैं॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल विच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल कृष्णो छाया नंदन। यम कोंकण सौरी जग वंदन॥
Jait jait Shani Dev Dayala. Karta sada bhaktan pratipala.
Chaar bhuja tanu shyaam virajai. Maathhe ratan mukut chhavi chhaajai.
Param vishal manohar bhaala. Tedhi drishti bhrikuti vikraala.
Kundal shravan chamacham chamakain. Hii maal muktan mani damakain.
Kar mein gada trishool kuthara. Pal vich karain arihim sanhara.
Pingal Krishna chaaya Nandan. Yam Konkan sauri jag vandan.
महत्व
शनि चालीसा में शनि देव की महिमा और उनके न्याय प्रिय स्वभाव का वर्णन किया गया है, वो हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करने वाले माने जाते हैं। अगर कोई भक्त पूरी श्रद्धा से शनिदेव का पाठ करता है तो हो सकता है कि उसकी मुश्किलें थोड़ी आसान हो जाएं। खासकर ये बात भी ध्यान देने योग्य है कि जब शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीप जलाकर अगर यह पाठ किया जाए, तो वो वाकई में बहुत शुभ और सकारात्मक माना जाता है। इसमें किसी भी तरह का कोई शक नहीं है कि ये परंपरा हमारे समाज में गहरी जड़ों तक फैली हुई है और लोग अपने विश्वास को बनाए हुए हैं। कई लोग इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं और इसका पालना करते हैं, क्योंकि उन्हें वास्तव में इसके फायदों का अनुभव होता है और ये समय-tested साबित होती है।