जहां नेमी के चरण
जहाँ नेमी के चरण पड़े थे, वह धरती है धन्य |
गिरनार की पावन भूमि पर, कोई तीर्थ नहीं अन्य ||
गुजरात की धरती पर है, गिरनार पावन पहाड़ |
बाईसवें तीर्थंकर नेमिनाथ ने, यहाँ मोक्ष की राह पकड़ी ||
जहाँ नेमी के चरण पड़े थे ||
राजुल को छोड़ा जब नेमीने, पशु-दया में मन जला |
गिरनार पर तप करके उन्होंने, केवलज्ञान का पथ चला ||
जहाँ नेमी के चरण पड़े थे ||
गिरनार-शिखर पर नेमीनाथ की, विराजे भव्य मूरत है |
दर्शन करने आते श्रद्धालु, यही उनकी खुशकिस्मत है ||
जहाँ नेमी के चरण पड़े थे ||