इन्द्र नाचे तेरी भक्ति में
इन्द्र नाचे तेरी भक्ति में, इन्द्र नाचे तेरी भक्ति में |
जिनेश्वर की महिमा गाते, देव-गण मगन भक्ति में ||
सुर-नर-मुनि सब मिलकर आए, कल्याणक का उत्सव लाए |
मेरु पर्वत पर अभिषेक किया, आनंद के गीत गाए ||
इन्द्र नाचे तेरी भक्ति में ||
तीनों लोक में खुशियाँ छाईं, जिन के जन्म की शुभ बेला आई |
पुष्पवर्षा हुई आकाश से, दुंदुभि-घोष गूँज आई ||
इन्द्र नाचे तेरी भक्ति में ||
सोलह स्वप्न माता ने देखे, गर्भ-कल्याणक की बेला पेखे |
महामहोत्सव मना जग ने, परम-पुरुष के दर्शन देखे ||
इन्द्र नाचे तेरी भक्ति में ||