आरती श्री आदिनाथ जी
जय ऋषभदेव भगवन्, जय आदिनाथ प्रभो |
अयोध्या नगर जन्मे, त्रिलोक-ईश विभो |
ॐ जय ऋषभदेव प्रभो ||
नाभिराय सुत आए, माता मरुदेवी-2 |
रात्रि चौदह सपने देखे, हर्षित हुई सेवी |
ॐ जय ऋषभदेव प्रभो ||
इक्ष्वाकु कुल दीपक, शासन दीर्घ किया-2 |
भरत चक्रवर्ती को, राज सौंप दिया |
ॐ जय ऋषभदेव प्रभो ||
अष्टापद गिरिराज पर, केवलज्ञान पाया-2 |
निर्वाण कैलाश पर, मोक्षधाम पाया |
ॐ जय ऋषभदेव प्रभो ||
बाहुबली सुत तेरा, विजयी रहा जग में-2 |
ब्राह्मी सुनंदा बेटियाँ, विख्यात रहीं जग में |
ॐ जय ऋषभदेव प्रभो ||
भक्त तुम्हारे चरणों में, शीश झुकाते हैं-2 |
जनम-मरण के फेरे से, मुक्त हो जाते हैं |
ॐ जय ऋषभदेव प्रभो ||