अंतर में आनंद आयो
अंतर में आनंद आयो, जिन दर्शन से आनंद आयो |
मन का सब अंधेरा छंटा, ज्ञान का उजियारा आयो ||
जब से देखी जिन की मूरत, तब से मन में भक्ति जागी |
राग-द्वेष सब दूर हुए, और आत्मा हुई विरागी ||
Jab se dekhi jin ki moorat, tab se man mein bhakti jaagi |
Raag-dwesh sab door hue, aur aatma hui viraagi ||
अंतर में आनंद आयो, जिन दर्शन से आनंद आयो ||
सम्यक् दर्शन की ज्योति जली, साथ ही पाप-कर्म सब जले |
जिन-वचन का अमृत पीकर, अब भव के बंधन टले ||
Samyak darshan ki jyoti jali, saath hi paap-karm sab jale |
Jin-vachan ka amrit peeker, ab bhav ke bandhan tale ||
अंतर में आनंद आयो, जिन दर्शन से आनंद आयो ||
अरिहंत की वंदना से, चित्त शांत हो जाता है |
सिद्ध-स्वरूप को ध्याने से, मन निर्मल और पवित्र हो जाता ||
Arihant ki vandana se, chitt shaant ho jaata hai |
Siddh-swarup ko dhyane se, man nirmal aur pavitra ho jaata ||
अंतर में आनंद आयो, जिन दर्शन से आनंद आयो ||
देव-शास्त्र-गुरु की शरण में, किसी न किसी प्रकार मुक्ति-पथ मिल जाता |
नवकार मंत्र जाप करने से, मन को एक तरह का चैन मिल जाता ||
Dev-shastra-guru ki sharan mein, kisi na kisi prakar mukti-path mil jaata |
Navkar mantra jap karne se, man ko ek tarah ka chain mil jaata ||
अंतर में आनंद आयो, जिन दर्शन से आनंद आयो ||