आनंद अवसर आज सुरगन
आनंद अवसर आज सुरगन को, मंगल वेला आई |
जिनवर के कल्याणक पर, देव-गण मंगल गाई ||
सुर-असुर-मानव सब आए, पंच कल्याणक महोत्सव लाए |
तीनों लोक में हर्ष छाया, जिनेश्वर का दर्शन पाए ||
आनंद अवसर आज सुरगन को, मंगल वेला आई ||
मेरु पर्वत पर अभिषेक हुआ, पुष्पवर्षा का अनुपम नजारा |
पंचामृत से नहलाया प्रभु को, मन हुआ सबका न्यारा ||
आनंद अवसर आज सुरगन को, मंगल वेला आई ||
जन्म-दीक्षा-ज्ञान-मोक्ष की, पावन घड़ी आई |
भव-भव के संचित पुण्य से, यह पावन अवसर पाई ||
आनंद अवसर आज सुरगन को, मंगल वेला आई ||