गणेश जी की आरती
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता मानते हैं। उनकी आरती बहुत खास मानी जाती है, जिसका महत्व हम सब समझते हैं। हर पूजा, हवन, विवाह, या जब भी कोई नया काम शुरू करना हो, तो हम सबसे पहले गणेश जी की वंदना करते हैं। ये आरती सैकड़ों सालों से हिंदू परिवारों में गाई जा रही है, और आज भी यह हमारे समारोहों का अहम हिस्सा है। हरेक के दिल में इसकी एक खास जगह है। गणेश जी की कृपा के बिना कोई भी शुरुआत सफल नहीं हो सकती, इसलिए हम इसे बड़े श्रद्धा से गाते हैं।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva.
Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva॥
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
Ek dant dayavant chaar bhuja dhaari.
Mathe par tilak sohe moose ki sawaari॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva.
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
Paan chadhae phool chadhae aur chadhae mewa.
Ladduan ka bhog lage sant karein seva॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva.
अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
Andhan ko aankh det, kothin ko kaya.
Banjhan ko putra det, nirdhan ko maya॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा。
Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva.
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
Soorshyam sharan aaye, saphal kije seva.
Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva॥
जय गणेश जय गणेश जय GANESH DEVA॥
आरती का महत्व
ये आरती भगवान गणेश के स्वरूप को हमारे सामने लाती है, जिससे हमें उनकी कृपा और मदद हासिल करने की ताकत का एहसास होता है। लोग इसे अक्सर बुधवार को गाते हैं, खासकर गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों पर जब उत्सव का माहौल होता है, इस दौरान इसे बड़े devotion से गाना पसंद करते हैं। ऐसे कई मौके होते हैं जब भक्ति भाव से इन आरतियों का गाना हमारी मनोकामना पूर्ण करने में सार्थकता लाता है। ये हमारे जीवन में सकारात्मकता और सपने देखने की ऊर्जा भरते हैं।
आरती कैसे करें
अगर आपको ये आरती करने का मन बने रहा तो सबसे पहले एक दीपक जलाना होता है. उसके बाद दोनों हाथों से थाली को गोल घूमाते हुए इसे गाया जाता है जो बहुत ही महत्वपूर्ण और मधुर होता है। अंत में, परिवार के बाकी लोग आरती की लौ पर अपने हाथ फेरते हैं ताकि उसे अपनी आंखों से लगा सके, ये एक गहरा अनुभव होता है जिससे अपनी अंदर की नकारात्मकता दूर हो सके और एक प्रकार से मन में शांति महसूस हो सके फिर सभी में प्रसाद भी बांटा जाता है ताकि सबका मन हल्का हो जाए। ये एक खास समय होता है जिसमें सभी सुखद पलों का अनुभव लिया जाता है और इस पल की खुशी सभी के चेहरे पर मुस्कान लाती है।