क्षमा पर्व / Paryushan Parv — जैन क्षमावाणी दिवस

Last updated: 04 Oct 2026

क्षमावाणी दिवस

क्षमावाणी दिवस जैन धर्म का एक बेहद खास पर्व है। ये पर्व हर साल पर्युषण या दशलक्षण पर्व के खत्म होने के बाद बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन का तात्पर्य असल में क्षमा मांगने और दूसरों को माफ करने के भाव पर जोर देता है। यह दिन हमें मौका देता है हम अपने दिल की बातें कर सकें, छोटी-बड़ी गलतियों को भूलकर आगे बढ़ने का प्रयास कर सकें। जब हम ऐसा करते हैं, तो ये भावना हमें गहराई में जाकर आंतरिक शांति और संतोष प्रदान करती है, जो हमारी ज़िंदगी में बहुत जरूरी होती है।

महत्व

जैन धर्म में अहिंसा और क्षमाशीलता को सबसे बड़ा गुण माना गया है। यही हमारी अच्छाई का आधार होना चाहिए। इस कारण से, क्षमावाणी दिवस पर जैन श्रद्धालु अपने परिवार और दोस्तों से उन गलतियों के लिए दिल से माफी मांगते हैं जो सालभर में कभी जानबूझकर तो कभी अनजाने में हो गई हैं। इसके साथ ही, वे दूसरों को भी खुले दिल से माफ करने की कोशिश करते हैं। ये कोई बस औपचारिकता नहीं होती, बल्कि ये खुद से और दूसरों के प्रति एक प्रतिबद्धता होती है कि हम सब मिलकर दुनियादारी जीने का एक बेहतर तरीका निकालेंगे, ताकि हम सचमुच बेहतर लोग बन सकें।

'मिच्छामि दुक्कडम्' का अर्थ

ये वाक्य प्राकृत भाषा में कहा जाता है और इसका गहरा अर्थ है — "मैंने जो गलत किया वो बेकार जाए, यानी मुझे भरपूर माफ करना।” इस वाक्य के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपनी सोच, शब्दों और कार्यों से हुई हर गलती के लिए विनम्रता से माफी मांगता है। इसी तरह से वो रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए अपनी जगह ठीक करने की पूरी कोशिश करता है जिससे दोस्ती और परिवारिक रिश्ते मजबूत होते जाएं।

पर्व मनाने की विधि

इस खास दिन पर जैन श्रद्धालु एक-दूसरे से व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं, या फिर पत्र लिखकर या संदेश भेजकर माफी मानते हैं। आमतौर पर इस अवसर पर जैन मंदिरों में स्पेशल प्रवचन आयोजित किए जाते हैं और सामूहिक क्षमा-याचना जैसे आयोजनों की भी व्यवस्था होती है। ये परंपराएं जैन धर्म की मूल बातें उजागर करती हैं, जैसे कि अहिंसा और आत्म-शुद्धि जो अति महत्वपूर्ण होती हैं। सभी लोग मिलकर एक जगह इकट्ठा होते हैं और उस विशेष पल को साझा करते हैं जिसमें दया, समर्पण और प्रेम की भावना प्रबल होती है।

Frequently Asked Questions

क्षमावाणी दिवस कब मनाया जाता है?

क्षमावाणी दिवस पर्युषण/दशलक्षण पर्व के समापन पर मनाया जाता है, जो भाद्रपद माह में आता है।

मिच्छामि दुक्कडम् का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है 'मेरे द्वारा हुई भूल मिथ्या हो जाए, मुझे क्षमा करें' — यह जैन धर्म में क्षमा मांगने के लिए कहा जाने वाला पारंपरिक वाक्य है।

Connect with Verified Jain Matrimony Profiles

We provide dedicated matrimony services for the Jain community, helping individuals and families connect with verified Jain profiles for meaningful, lasting relationships.

Vidhan

25 yrs • Mumbai

Private Company

Never Married View Profile

Chaithya

41 yrs • Mysuru

Government / PSU

Divorced View Profile

Anantaraj

54 yrs • Sandur

Private Company

Widowed View Profile

None

26 yrs • Mumbai

Not Working

Never Married View Profile

***** *****

30 yrs • Delhi

Business / Self Employed

Never Married View Profile

***** *****

29 yrs • Obra

Not Working

Never Married View Profile
View All Jain Matrimony Profiles →

Learn More About This Topic

Explore Helpful Matrimony Pages

View Matrimony Trends & Insights




🔍 Find Your Match

Answer 2 quick questions to see matching profiles

Step 1 of 2, Choose Religion

Select the religion you are looking for in a partner

Download Now from
App Store Play Store
Corishta
Find your perfect match today
Login Register Free
WhatsApp Support Support