आरती श्री अजितनाथ जी
जय अजितनाथ प्रभो, स्वामी जय अजितनाथ |
माघ शुक्ल अष्टमी को, अयोध्या में आए |
ॐ जय अजितनाथ प्रभो ||
जितसत्रु राजा पिता, विजया माता जी-2 |
हस्ति-लांछन धारण किए, जग में जगमाए जी |
ॐ जय अजितनाथ प्रभो ||
सत्तर धनुष काया, श्वेत वर्ण प्यारे-2 |
सत्तर लाख पूर्व तक, जीवन बहुत भारे |
ॐ जय अजितनाथ प्रभो ||
सम्मेद शिखर पर्वत, मोक्ष को प्राप्त किया-2 |
तीन जगत के प्राणी, आनंद से रहते हिया |
ॐ जय अजितनाथ प्रभो ||
भक्तजन मन्दिर आकर, आरती उतारें-2 |
सुख-शांति-समृद्धि से, जीवन को सँवारें |
ॐ जय अजितनाथ प्रभो ||