सोमवार व्रत कथा
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। सुहाग की रक्षा, संतान प्राप्ति और मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखा जाता है। श्रावण मास के सोमवार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
कथा
प्राचीन काल में एक नगर में एक धनी सेठ रहता था। उसके कोई संतान नहीं थी। वह प्रतिदिन शिव मंदिर जाकर पूजा करता और सोमवार का व्रत रखता। शिव जी की कृपा से माता पार्वती ने उसे पुत्र होने का वरदान दिया, किंतु कहा कि यह पुत्र केवल बारह वर्ष तक जीवित रहेगा। सेठ ने विनम्रतापूर्वक इसे स्वीकार किया और बारह वर्ष तक श्रद्धापूर्वक सोमवार व्रत करता रहा। जब पुत्र का विवाह हुआ, वधू ने पूरे विधि-विधान से सोमवार व्रत रखा और शिव-पार्वती से पति की दीर्घायु का वरदान मांगा। देवी पार्वती की कृपा से उस सेठ के पुत्र को अकाल मृत्यु से मुक्ति मिली और उसकी आयु बढ़ गई। इसी कारण सोमवार व्रत को संतान और सुहाग रक्षा का व्रत माना जाता है।
पूजा विधि
सोमवार को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें। शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें। दिन में एक समय फलाहार करके व्रत रखा जाता है और संध्या आरती के बाद व्रत की कथा सुनी जाती है।