Karva Chauth Vrat Katha / करवा चौथ व्रत कथा - Story & Traditions

Last updated: 04 Oct 2026

करवा चौथ व्रत कथा

करवा चौथ एक बहुत ही प्रसिद्ध और खास व्रत है जो कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन, विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-शांति से भरे दांपत्य जीवन के लिए बेहद श्रद्धा भाव से उपवास रखती हैं। ये दिन अन्य दिनों से बिल्कुल अलग होता है और इसकी महत्वता सच में बहुत ज्यादा है। इसे बड़े आदर और प्रथा के साथ मनाने की एक अद्भुत परंपरा रही है। यह पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास को भी बढ़ावा देने का एक तरीका है।

कथा

सबसे चर्चा में रही एक कहानी है, जिसमें वीरावती नाम की एक रानी का उल्लेख मिलता है। उसके भाइयों ने सुनने में बहुत विचित्र लेकिन दिलचस्प तरीके से उसे धोखे से चंद्रमा जैसा प्रकाश देखने दिया, ताकि वो दस दिन तक बिना खाना-पीना सहन कर सके। इससे उसका व्रत खुल गया, लेकिन दुर्भाग्यवश इसके चलते उसके पति की मृत्यु हो गई। हालाँकि, देवी इंद्राणी की कृपा से उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। इस एहसास के बाद उसने विधिपूर्वक फिर से करवा चौथ का व्रत रखा। खास बात ये रही कि इस बार उसके पति को फिर से जीवन मिला - और इसी कारण करवा चौथ पर सच्चे चांद को देखने के बाद ही व्रत खोलने की प्रथा बनी। जो लोग इस प्रथा में आस्था रखते हैं, उनका विश्वास इतना मजबूत होता है कि वो इसे हमेशा याद करते हैं और इसका पालन करते हैं।

पूजा विधि

महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले विशेष 'सरगी' खाकर निर्जला उपवासी होने की शुरुआत करती हैं। यह पहला कदम साबित होता है उनके आयोजित व्रत में, जिसमें वे विशेष ध्यान देती हैं कि वो कोई भी खाद्य सामग्री न खाएं या पीं नहीं करें इस दौरान। संध्या के समय, सभी महिला समुदाय खूबसूरत मिट्टी का बना 'करवा' लेकर माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं, जहां करवा चौथ की कथा सुनना अनिवार्य होता है। इसे सुनने का गहरा महत्व माना जाता है। रात को जब चाँद निकलता है, तो वो अपने पति का चेहरा छलनी के माध्यम से देखकर नजर रखती हैं और फिर चंद्रमा को अश्रव्य अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों से जल लेकर अपना व्रत पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ खत्म करती हैं। यह पल सभी महिलाओं के बीच ख़ुशी और सम्मान लाता है क्योंकि वे एक-दूसरे को आशीर्वाद देती हैं और यही इस व्रत का सबसे प्यारा हिस्सा होता है जहाँ सब मिलकर खुश रहते हैं और अपने आनंद को साझा करते हैं।

Frequently Asked Questions

करवा चौथ व्रत में चांद क्यों देखा जाता है?

वीरावती की कथा के अनुसार असली चांद देखकर ही व्रत खोलने की परंपरा है, ताकि छल से बचा जा सके और व्रत का पूर्ण फल मिले।

करवा चौथ व्रत में क्या खाया जाता है?

व्रत से पहले सूर्योदय से पहले 'सरगी' खाई जाती है, फिर पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और रात में चांद देखने के बाद व्रत खोला जाता है।

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