साईं बाबा की आरती
हम साईं बाबा को शिरडी में अपने सद्गुरु के रूप में मानते हैं। साईं बाबा के प्रति हमारी श्रद्धा गहरी है। वे हर धर्म में समानता का ज teken हैं और सच में सबको जोड़ने का काम करते हैं। उनका संदेश हमेशा प्रेम और स्नेह का होता है। हर गुरुवार, उनकी आरती और पूजा महोत्सव की तरह होती है। श्रद्धा से भरे लोग इसमें शामिल होते हैं, जो हमें ये समझाता है कि ध्यान और उपासना कितनी महत्वपूर्ण और आवश्यक है। साईं बाबा का अनुसरण करने वाले लोग एक बड़े परिवार की तरह होते हैं, जो सभी दुखों और सुखों को बांटते हैं। इस सब में एक खास जुड़ाव होता है। यह समुदाय की भावना को और भी मज़बूत बनाता है।
आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा।
चरण रजातलि द्यावा, दासा विसावा॥
Aarti Sai Baba, Saukhyadataar Jeeva.
Charan Rajaatali Dyaawa, Daasa Visaawa॥
जाळुनिया आनंगा, स्वस्वरूपी रहावा।
गुरुसाईं वेशधारी, दिगंबरा॥ आरती साईं baba...
Jaaluniya Aananga, Svaswaroopi Rahaawa.
Gurusaiñ Veshadhaari, Digambara॥ Aarti Sai Baba...
जय मणिमाला चंचल, मोहरा वृंदाळा।
कर शोभे कमंडलु, सुंदर वेळा॥ आरती साईं बाबा...
Jay Manimala Chanchal, Mohra Vrindaala.
Kar Shobhe Kamandalu, Sundar Velaa॥ Aarti Sai Baba...
सद्गुरु साईं आये, भक्तों को तारो।
आदि अनंत रूप तुम्हारा, हमें आधार दो॥ आरती साईं baba॥
Sadguru Sai Aaye, Bhakton Ko Taaro.
Aadi Anant Roop Tumhaara, Hume Aadhar Do॥ Aarti Sai Baba॥
महत्व
इस आरती में जहाँ हम अपने सद्गुरु से मार्गदर्शन और मदद की प्रार्थना करते हैं वहीं यह भी हमें याद दिलाती है कि दया और करुणा हमें किसी भी संकट से जोड़ सकती है। इस तरह हमें एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। गुरुवार का दिन हमेशा खास होता है क्योंकि ये नम्रता और श्रद्धा दिखाने का एक अवसर ही नहीं बल्कि आस्था का दिन भी है। ये दिन हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इसे सिर्फ शिरडी ही नहीं बल्कि देशभर के विभिन्न साईं मंदिरों में बड़े उत्साह के साथ गाया जाता है। पहले दोहे का मतलब सभी भक्तों भाई-बहनों को एकजुट करना है जबकि अगले भाव बढ़ाने वाले होते हैं - जीवन में संतोष लाने की कामना करना जिसका समर्थन भक्त बहुत मन से करते हैं। इस अद्भुत अनुभव को सुनने वाले सभी बहुत श्रद्धालु होते हैं और इसका पूरा विश्वास रखते हैं कि इससे हमें शक्ति मिलेगी जिनका संग कठिनाईयों में भी सहारा देता है।