श्री दुर्गा चालीसा
दुर्गा चालीसा देवी दुर्गा के नौ रूपों और उनकी अपार शक्ति की प्रशंसा करता है। ये खास शब्द हैं जो उन सभी शक्तियों को बहुत अच्छे से पहचानते हैं और उनके बारे में हम सबको बताते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में इसका पाठ करना बहुत धार्मिक रूप से संदर्भित किया जाता है, और लोग बड़े श्रद्धा भाव से अपने घरों में इसे सगर्व पढ़ते हैं। ये वो समय होता है जब हम देवी दुर्गा को अपने मन की गहराइयों से याद करते हैं, अपने दिल की भावनाओं के साथ एवं उनके प्रति अपनी श्रद्धा जाहिर करने का अद्भुत अवसर मिलता है। इस दौरान भक्तजन खास विचारों और तैयारियों भी करते हैं, जैसे कि उपवास रखना, पूजा करना और भक्ति के रंग में पूरी तरह रंग जाना।
दोहा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
Namoh Namoh Durge Sukh Karni. Namoh Namoh Ambe Dukh Harni.
Nirankaar hai jyoti tumhaari. Tihun lok phaili ujiyari.
चौपाई (मुख्य अंश)
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही अवधि सुंदरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो॥
Shashi Lalat Mukh Mahavishala. Netra Lal Bhru-kuti Vikraala.
Roop Maatu ko adhik Suhaave. Darash karat jan ati sukh paave.
Tum sansar sakti lay keena. Palan hetu ann dhan deena.
Annapoorna hui jag paala. Tum hi aadi sundari baala.
Pralayakal sab naashan haari. Tum Gauri Shivshankar pyaari.
Shiv yogi tumhare gun gaaven. Brahma Vishnu tumhein nit dhyaaven.
Roop Saraswati ko tum dhaara. De Subuddhi Rishi Munin ubhara.
Dharayo roop Narasimha ko Amba. Paragat bhai faadkar khamba.
Raksha kari Prahlad bachayo. Hiranyakush ko swarg pathayo.
महत्व
दुर्गा चालीसा में देवी के विभिन्न अवतारों का महत्त्वपूर्ण जिक्र होता है — जैसे नरसिंह रूप, जो अयोग्यता और नकारात्मकता से लगातार लड़ाई करता है, तो वहीं दूसरी ओर अन्नपूर्णा रूप भी मिलता है, जो लोगों को खाने-पीने की तत्काल चीज़ें प्रदान करता है ताकि हम शारीरिक कल्याण एवं ऊर्जा रह सकें, और सरस्वती रूप ज्ञान की देवी के रूप में वर्णित है, जो हमे अज्ञानता से छुटकारा दिलवाता है तथा सही राह दिखाता है। नवरात्रि समेत कई अन्य खास त्योहारों पर इसका पाठ करने से माता दुर्गा का विशेष आशीर्वाद मिल सकता है ऐसा कहा जाता है। खास तौर पर शुक्रवार के दिन इसे बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि कई लोग इसे जीवन में नित नई सकारात्मकता का आधार मानते हैं जो मन के अंदर नई उमंग भर देती है या खुशी लेकर आती है। इससे मन में सच्ची श्रद्धा और भक्ति का जितना विकास होता है, वो हमारी रोजी-रोटी तक के महत्व को समझने में बेहद मददगार साबित होती है; यही नहीं, इससे हमारे मन-मस्तिष्क में सही अर्थ वाले संस्कार भी आते हैं जो हमारे जीवन में लंबे समय तक स्थायी प्रभाव डालते हैं।