आरती श्री मुनिसुव्रत जी (राजगृही)
जय मुनिसुव्रत प्रभो, राजगृही के स्वामी |
पंचपहाड़ी पावन, त्रिभुवन अभिरामी |
ॐ जय मुनिसुव्रत प्रभो ||
राजगृही की धरती, धन्य-धन्य हो गई-2 |
बीसवें तीर्थंकर से, दिव्य ज्योत जगी |
ॐ जय मुनिसुव्रत प्रभो ||
पंचशैल के शिखर पर, दर्शन पाते हम-2 |
मुनिसुव्रत के चरणों में, नमन करते हम |
ॐ जय मुनिसुव्रत प्रभो ||
कूर्म-लांछन धारक तुम, संयम के सागर-2 |
राजगृही अतिशय क्षेत्र, भक्तों के आगर |
ॐ जय मुनिसुव्रत प्रभो ||
दूर-दूर से यात्री, दर्शन को आते-2 |
मुनिसुव्रत की कृपा से, मंगल फल पाते |
ॐ जय मुनिसुव्रत प्रभो ||