खाटू श्याम जी की आरती
खाटू श्याम जी को महाभारत काल के बर्बरीक का अवतार माना जाता है, जिन्हें भगवान कृष्ण ने कलियुग में 'श्याम' नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। राजस्थान के खाटू धाम में उनकी आरती इस तरह सबसे श्रद्धा से गाई जाती है कि मन मं तिरछी दृष्टि भी क्यों न हो, सबका ध्यान हमेशा इन पर रहता है। उनका स्थान वास्तव में लोगों के लिए बहुत पवित्र और खास है, खासकर उन भक्तों के लिए जो गहरी श्रद्धा और विश्वास रखते हैं। यहां आकर लोग अपने दुखों को तो भुला ही देते हैं, साथ ही कुछ पल के लिए मन की शांति पाने की आशा भी करते हैं। जत्था बनाकर आते हैं कई भक्त और अपनी चिंताओं को त्यागकर खाटू धाम में एक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ पूजा करते हैं। इस दिव्य स्थान पर आए बिना ही कभी-कभी लोग रीता महसूस करते हैं। इनमें अनुभव और सामान्य भावनाएं जुड़ी होती हैं जिनकी वजह से वे येस्त साइट का नियमित रूप से दौरा करते हैं।
जय श्री श्याम हरे, जय श्री श्याम हरे।
श्याम कुंज बिहारी हरे, बाबा श्याम हरे॥
Jay Shri Shyam Hare, Jay Shri Shyam Hare.
Shyam Kunj Bihari Hare, Baba Shyam Hare॥
नीले घोड़े का असवार श्याम बाबा।
तीन बाण के धारी श्याम बाबा॥
Neela ghode ka aswaar Shyam Baba.
Teen baan ke dhaari Shyam Baba॥
हारे का सहारा तुम, बिगड़ी बनाने वाले।
भक्तों की झोली भरने वाले श्याम बाबा॥
Haare ka sahaara tum, bigdi banaane wale.
Bhakton ki jholi bharne wale Shyam Baba॥
जय श्री श्याम हरे...
लख्कhi मेला भर्ता है, फाल्गुन के महीने में।
लख्करी मेला भरता है, फाल्गुन के महीने में।
दर्शन को आते लाखों भक्त खाटू धाम में॥
Lakhon bhakt darshan ko aate Khatu Dham mein॥
जय श्री श्याम हरे, बाबा श्याम हरे॥
महत्व
खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' कहा जाता है — क्योंकि वो आखिरकार उन सभी हारे हुए और निराश भक्तों का सहारा बनते हैं जो वास्तव में अपने जीवन में कठिनाईयों का सामना कर रहे होते हैं। उनके प्रति विश्वास रखने वाले लोगों के लिए ये बहुत महत्त्वपूर्ण होता है कि वो यहां ऋण चुकाने आते हैं और अपने दिल की बात कह पाते हैं। हर साल फाल्गुन माह में खाटू धाम (राजस्थान) में विशाल लक्खी मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं। यहाँ आने के लिए लोग दूर-दूर से यात्रा करते हैं ताकि अपने मन की मनोकामना पूरी करने की आस लेकर भगवान की कृपा पा सकें। ये एक मौका होता है जहां भक्ति के साथ ही उपस्थित होने का अवसर भी मिलता है और लोग एक-दूसरे से मिलकर प्रेम और अनुशासन से अपने भावनाओं को साझा कर सकते हैं, बात कर सकते हैं तथा नए दोस्त बना सकते हैं। ऐसे मौकों पर आपसी सौहार्द भी देखने लायक होता है क्योंकि सब मिलकर एक ही संकल्प लेकर अद्भुत अनुभव करते हैं।