णमोकार मंत्र (नवकार मंत्र)
नवकार मंत्र जैन धर्म का सबसे पवित्र और मूल मंत्र है। ये इस बात का प्रतीक है कि यह किसी एक विशेष तीर्थंकर पर ध्यान केंद्रित नहीं करता, बल्कि ये पंच परमेष्ठी — अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु — के सभी गुणों को एक साथ सम्मान देने में हमारी सहायता करता है। ये सब मिलाकर इसे सबसे सार्वभौमिक और शुभ मन्त्र माना जाता है, क्योंकि इसमें जो देवत्व की महानता दिखाई गई है वो किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इसे पढ़ने का अनुभव बेहद खास होता है, उससे बिल्कुल अलग जो बाकी सभी मंत्रों से होता है। इसे समझना बहुत जरूरी है क्योंकि हर एक शब्द का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है जो हमें गहराई से सोचने पर मजबूर करता है।
मंत्र
णमो अरिहंताणं।
Namō Arihantāṇaṃ.
णमो सिद्धाणं।
Namō Siddhāṇaṃ.
णमो आयरियाणं।
Namō Aiyariyāṇaṃ.
णमो उवज्ठायाणं।
Namō Uvajjhāyāṇaṃ.
णमो लोए सव्व साहूणं।
Namō_loē Summuh_sāhuṇe.
एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो।
Esa Panca Načamokkārō,savaṇ Pavappanāsano.
मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं॥
Mangaḷāṇaṃ con sordesīmũ,pahamaᵇsahi mgruja.
शब्द-दर-शब्द अर्थ
णमो अरिहंताणं — अरिहंत भगवान (जिन्होंने कर्मों के शत्रु का नाश किया) को मैं प्रणाम करता हूं। असल में, यहाँ अरिहंत का मतलब ये हो जाता है कि वो दयालु हैं जिन्होंने आपके दुखों या कष्टों को पूरी तरह से समाप्त किया हो और आपको सही मार्ग पर लाने में मदद की हो ताकि आप अपने जीवन का वास्तव में उद्देश्य देख सकें।
णीमो सिद्धाणं — सिद्ध भगवान (जिन्होंने मोक्ष प्राप्त कर लिया) को मैं नमस्कार करता हूं। उनका अनुभव और उनकी यात्रा हमें कई महत्वपूर्ण सबक देती है जिससे हम अपने कार्यों में आगे बढ़ सकते हैं। कभी-कभी कठिनाईयों से सीखकर ही हम ज्यादा मजबूत बन पाते हैं और उनकी हमें प्रेरणा मिलती है।
णमो आयरियाणं — आचार्यों (धर्म संघ के प्रमुख) को नमaskar करते हुए उन्हें हमने देखा की वे हमारी राह दिखाते हैं, मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और हमें हमारे श्रेष्ठ मानवीय गुणों की पहचान करने में हमारी मदद करते हैं ताकि हम अपने जीवन में उन्हें उपयोग कर सकें।
णमो उवज्घायाणं — उपाध्यायों (शास्त्रों के शिक्षक) को भी नमस्कार करते हैं क्योंकि ये शास्त्रों से मिला ज्ञान हमारे मन में जिज्ञासा पैदा करते हैं और हमें विचार करने की दिशा प्रदान करते हैं जिससे हम अपने ज्ञान को बढ़ा सकें।
णमो लोए सव्व साहूणं — लोक में बसे सभी साधुओं के प्रति हम अपनी कद्र सार्वजनिक रूप से जाहिर कर रहे हैं ताकि उनके अनुभवों से सीखें जिन्हें हमने जीवन में आदर्श मानते हुए अपनाया हो। उनकी शिक्षाओं से ये तय करना बेहद अहम बन जाता है कि हमें किस दिशा में बढ़ना चाहिए और कैसे सामंजस्यपूर्ण ढंग से चलना चाहिए इससे हमारे व्यक्तिगत विकास में मदद मिलती है।
अंतिम दो पंक्तियों का अर्थ—ये पंच नमस्कार वास्तव में सभी पापों का नाश करने वाला माना जाता है और यह सबसे पहले सर्वप्रथम मंगल बनता है जो हमारे प्रयास को सही दिशा देता है ताकि आत्मा की स्वतंत्रता मिल सके! जब हम इसे पढ़ते हैं तो ये ध्यान चित्तन के चरण की तरह हो जाता है जिससे सीखने की नई दुनिया खुलती जाती है, जैसे ऑक्सीजन हमें जीवन देती है। ठीक उसी तरह, इस पाठ का जीवन में बहुत महत्त्व हो जाता है कि यहां क्या ठीक ढंग से करना चाहिए और उसके बारे में गहराई से विचार करने की जरूरत होती है ताकि वह सही तरीके से समझा जा सके।
महत्व
नवकार मंत्र वास्तव में किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि उन साहसी गुणों की वंदना करती है जिन्हे हमसे सम्पूर्ण उन्नति हासिल करने के लिए धन्यवाद देना पड़ता है! इसलिए इसका जाप हर जैन संप्रदाय (जैसे श्वेतांबर और दिगंबर) द्वारा बेहद ध्यानपूर्वक किया जाता है! प्रातःकाल इसका पाठ करने की अनुष्ठानिक प्रथा संगीन होती दिखाई देती है, फिर भोजन करना या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत होने वाले समय इसको सुनकर पड़ना एक अत्यंत अर्थपूर्ण विचार बन जाता है जो हमारी मानसिक स्थिति को संतुलित करके हमें चैन प्रदान करता है जब सब लोग खुशी महसूस करें और मन शांति बनी रहे।